कोचिंग सिटी के रूप में पहचान बना चुका कोटा अब राजस्थान के नए टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। देश के 7 राज्यों से आए करीब 40 टूर ऑपरेटर्स ने कोटा और आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया, जहां करीब 20 किलोमीटर लंबी चंबल बोट सफारी और चंबल रिवर फ्रंट उनके आकर्षण का केंद्र रहे। करीब ढाई घंटे की बोट सफारी के दौरान टूर ऑपरेटर्स ने चंबल नदी के किनारों पर मगरमच्छ, पानी में घड़ियाल और आसमान में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को देखा। मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, राजकोट, शिलांग, सिलीगुड़ी, ओडिशा और मध्य प्रदेश से आए टूर ऑपरेटर्स ने चंबल सफारी को महज बोटिंग नहीं, बल्कि नदी के बीच जंगल और वाइल्डलाइफ देखने का अनोखा अनुभव बताया। टूरिज्म से जुड़े लोगों का मानना है कि कोटा-बूंदी को चंबल नदी, रिवर फ्रंट, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और हेरिटेज स्थलों के साथ जोड़कर बड़ा पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है। इसी योजना के तहत कोटा-बूंदी, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ और अजमेर-पुष्कर को जोड़कर विशेष ट्रैवल पैकेज तैयार किए जा रहे हैं। कोटा को रिवर सफारी, वाइल्डलाइफ, एडवेंचर और हेरिटेज के साथ-साथ वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी प्रमोट करने की तैयारी है। होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान की ओर से देशभर के टूर ऑपरेटर्स को कोटा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही यहां ट्रैवल मार्ट आयोजित करने की भी तैयारी है। स्थानीय सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पर्यटन विकास से जुड़े प्रयासों को भी इस दिशा में अहम माना जा रहा है। अगर चंबल की वाइल्डलाइफ सफारी और मुकुंदरा के प्राकृतिक पर्यटन को देश-विदेश के पर्यटकों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाता है, तो आने वाले समय में कोटा राजस्थान के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।