NEET पेपर लीक मामले को लेकर पिछले एक महीने से अधिक समय से चल रहा राजनीतिक और सामाजिक विवाद अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से लगातार जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों और 575 शब्दों की अपनी त्यागपत्र चिट्ठी साझा की, जिसमें उन्होंने अन्य बातों के साथ-साथ दो जगहों पर युवाओं को भ्रमित किए जाने का भी उल्लेख किया है। इस्तीफे की आधिकारिक खबर जैसे ही जंतर-मंतर पहुंची, आंदोलन की अगुवाई कर रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रमुख अभिजीत दीपके खुशी के मारे घुटनों के बल बैठ गए।
इस ऐतिहासिक मोड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने सरकार पर सीधा निशाना साधा और कहा, "लोग कहते थे कि इस सरकार में कभी इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि दुनिया झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए।" इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। पार्टी ने अपनी शेष मांगों को दोहराते हुए कहा कि NEET घोटाले से आहत होकर सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, छात्रों पर दर्ज सभी पुलिस केस तुरंत वापस लिए जाएं और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कदम उठाया जाए। दीपके ने चेतावनी दी कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, छात्र जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे।
