दीपावली पर एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए राजस्थान सरकार ने सख्त गाइडलाइन लागू कर दी है। पर्यावरण विभाग के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर से सटे प्रदेश के 6 जिलों में केवल अधिकृत ग्रीन पटाखों की ही बिक्री और आतिशबाजी हो सकेगी। बिना क्यूआर कोड वाले पटाखों के स्टॉक और ऑनलाइन बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
सिर्फ दो घंटे आतिशबाजी की अनुमति
राज्य के एनसीआर दायरे में आने वाले जिलों में 7 और 8 नवंबर को ही पटाखे चलाने की छूट दी गई है। इस दौरान लोग सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही आतिशबाजी कर सकेंगे। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की शासन सचिव शैलजा देवल के मुताबिक, तय समयसीमा के बाहर और 9 नवंबर से आतिशबाजी करने पर पूर्ण रोक रहेगी। इससे पहले 6 नवंबर तक सभी तरह के पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा।
सीएसआईआर-नीरी सर्टिफाइड पटाखे ही बिकेंगे
गाइडलाइन के तहत सिर्फ उन्हीं पटाखों को वैध माना जाएगा जिन्हें CSIR-NEERI से सर्टिफाइड किया गया है। बाजार में मिलने वाले हर ग्रीन पटाखे के पैकेट पर क्यूआर कोड होना अनिवार्य किया गया है। खरीदार इस कोड को स्कैन करके निर्माता कंपनी, लाइसेंस और सर्टिफाइड होने की पूरी जानकारी जांच सकेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पटाखों की खरीद-फरोख्त पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
साइलेंस जोन में आतिशबाजी पर सख्ती
हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, हेल्थ सेंटर, वृद्धाश्रम और शिक्षण संस्थानों के 300 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित किया गया है। इन संवेदनशील इलाकों के आसपास पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को इन नियमों की जमीनी स्तर पर सख्ती से पालना कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध बिक्री रोकने के लिए विशेष टीमें गठित
जिला कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को अवैध पटाखों का स्टॉक, सप्लाई और बिक्री रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है जो गोदामों और दुकानों का औचक निरीक्षण करेंगी। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर की सीमा पर आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों की भी विशेष चेकिंग की जाएगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर माल जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण बोर्ड रखेगा रोजाना नजर
दिवाली के दौरान और उसके बाद राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रोजाना प्रदूषण के स्तर की मॉनिटरिंग करेगा। बोर्ड के जिला कार्यालय लगातार डेटा जुटाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत नियमों को तोड़ने वाले दुकानदारों, निर्माताओं और आम नागरिकों पर कार्रवाई की जाएगी।
