मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' के तहत राज्य के 309 शहरी स्थानीय निकायों में एक साथ हुए चुनावों में अब तक घोषित 303 परिणामों में से 200 पर भाजपा ने अपने बोर्ड बना लिए हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी 95 सीटों पर सिमट गई है। इस चुनाव में मुख्यमंत्री स्वयं प्रत्याशी सर्वे से लेकर टिकट वितरण तक सक्रिय रहे और प्रचार में रोड शो मॉडल को जमीन पर उतारा।
संभागवार नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर में सबसे शानदार सफलता हासिल की है। जोधपुर संभाग की कुल 41 निकायों में से भाजपा ने 35 पर कब्जा जमाया है, जो कुल सीटों का 87 प्रतिशत है। इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी यहां मात्र 5 बोर्डों तक ही सीमित रह गई। पाली नगर निगम में शुरुआती पिछड़ने के बावजूद भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से अपना बोर्ड बनाया, जबकि जोधपुर नगर निगम के नतीजे अभी आने बाकी हैं।
भरतपुर और अजमेर में भगवा लहर
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर संभाग में भी पार्टी ने अपनी सांगठनिक पकड़ का पूरा असर दिखाया है। कुल 32 निकायों में से भाजपा ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो संभाग का 75 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि कांग्रेस को केवल 7 सीटों से संतोष करना पड़ा।
अजमेर संभाग में भाजपा ने 69 प्रतिशत सफलता हासिल करते हुए कुल 52 निकाय प्रमुखों में से 36 पर कब्जा जमाया। अजमेर नगर निगम में भी भाजपा ने पिछड़ने के बाद निर्दलीयों के समर्थन से अपना महापौर बनाने में कामयाबी हासिल की, जबकि कांग्रेस यहां सिर्फ 14 सीटों पर जीत सकी।
बीकानेर, उदयपुर, कोटा और जयपुर का हाल
बीकानेर संभाग में भाजपा ने 66 प्रतिशत से अधिक निकायों पर जीत हासिल की है। यहां की 37 में से 24 सीटों पर भाजपा और 10 सीटों पर कांग्रेस विजयी रही, हालांकि श्रीविजयनगर नगरपालिका का परिणाम अभी आना बाकी है। उदयपुर संभाग के 28 निकायों में से 18 पर भाजपा और 9 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जिससे भाजपा का स्ट्राइक रेट यहां 64 प्रतिशत रहा।
कोटा संभाग में 28 में से 15 निकाय जीतकर भाजपा ने 55 प्रतिशत सफलता प्राप्त की, जबकि कांग्रेस के खाते में 10 सीटें गईं। राजधानी जयपुर के संभाग में कुल 91 शहरी स्थानीय निकायों में से भाजपा ने 48 और कांग्रेस ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की। कोटा और जयपुर दोनों नगर निगमों के साथ-साथ सुकेत और खाटूश्यामजी नगरपालिकाओं के परिणाम आना अभी बाकी है।
9 जिलों में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया
इन चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि प्रदेश के 9 प्रशासनिक जिलों में कांग्रेस पार्टी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है। बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, डीग, डूंगरपुर, कोटा, फलोदी और पाली जिलों में कांग्रेस एक भी नगर निकाय में अपना बोर्ड नहीं बना सकी। इसके अलावा अजमेर, बांसवाड़ा, जैसलमेर, जालौर, प्रतापगढ़ और सिरोही ऐसे छह जिले रहे जहां कांग्रेस पार्टी केवल एक-एक बोर्ड ही जीत पाने में सफल हो सकी।
पारंपरिक तौर पर स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी दलों को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी विकासोन्मुख प्राथमिकताओं और बूथ-स्तरीय प्रबंधन को चुनाव का मुख्य आधार बनाया। प्रत्याशी चयन से लेकर मैदानी प्रचार तक सीधी निगरानी और सरकार-संगठन के बेहतर तालमेल ने इस ऐतिहासिक जनादेश की नींव रखी। आने वाले पंचायत चुनावों में भी पार्टी इसी सांगठनिक मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
