नागौर जिले की मूण्डवा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने बाजी मार ली है। आरएलपी समर्थित अलका कंदोई ने एक वोट के अंतर से जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार पालिका की कमान संभाली है। इस चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पार्टी प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं मिला।
एक वोट के अंतर से मुकाबला जीता
मूण्डवा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में अलका कंदोई को कुल 13 वोट मिले। उनके मुकाबले भाजपा से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे घनश्याम सदावत को 12 मत प्राप्त हुए। इस तरह अलका कंदोई ने महज एक वोट के अंतर से जीत हासिल कर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। यह उनकी लगातार दूसरी जीत है, इससे पहले भी वह मूण्डवा नगर पालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
भाजपा के पास था बहुमत, फिर भी प्रत्याशी का खाता नहीं खुला
यह चुनाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि मूण्डवा में पार्षदों के चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। पार्टी के 10 पार्षद निर्वाचित हुए थे और चार निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी उसे प्राप्त था। इस लिहाज से भाजपा खेमे के पास कुल 14 पार्षदों का समर्थन था, जो 20 सदस्यीय सदन में बहुमत के आंकड़े (11) से काफी अधिक था।
इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी गीता को चुनाव में एक भी वोट नहीं मिला। स्थिति यह रही कि उन्हें अपना खुद का वोट भी हासिल नहीं हुआ। पार्टी ने टिकट वितरण के दौरान घनश्याम सदावत और रमाकांत शर्मा को दरकिनार करते हुए पहली बार पार्षद चुनी गईं गीता को उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद बगावत के सुर उठ गए थे।
टिकट बंटवारे से शुरू हुई बगावत और समीकरण
टिकट नहीं मिलने से नाराज घनश्याम सदावत ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। दूसरी ओर, मूण्डवा निकाय चुनाव में रालोपा के 7 और कांग्रेस के 3 पार्षद जीतकर आए थे। चुनाव के दौरान भाजपा के एक बागी पार्षद का समर्थन भी रालोपा-कांग्रेस गठबंधन को मिला, जिससे उनके पास कुल 11 वोट हो गए जो जीत के लिए जरूरी थे। निर्दलीय मैदान में उतरे घनश्याम सदावत को भी 12 पार्षदों का साथ मिला, लेकिन अंततः आरएलपी प्रत्याशी अलका कंदोई ने बाजी अपने नाम कर ली।
