Sunday, 1 November 2026
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उज्जैन युवा धर्म संसद: मोहन भागवत बोले—रिलिजन नहीं, जीवन का अनुशासन है धर्म; 24 राज्यों के युवा ले रहे हिस्सा

संक्षेप में

उज्जैन के गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को केवल रिलिजन या कर्मकांड तक सीमित नहीं किया जा सकता, यह जीवन को अनुशासन और दिशा देने वाली व्यापक अवधारणा है। इस तीन दिवसीय आयोजन में 24 राज्यों के युवा हिस्सा ले रहे हैं।

मुख्य बातें

  • उज्जैन के गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक युवा धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है।
  • आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने धर्म को जीवन का अनुशासन बताया है।
  • इस कार्यक्रम में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा शामिल हो रहे हैं।
  • 19 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में कार्यक्रम का समापन होगा।
देश विदेश
उज्जैन युवा धर्म संसद: मोहन भागवत बोले—रिलिजन नहीं, जीवन का अनुशासन है धर्म; 24 राज्यों के युवा ले रहे हिस्सा

उज्जैन के गीता भवन में चल रही युवा धर्म संसद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने धर्म की आधुनिक परिभाषा पर खुलकर बात की। उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि धर्म को केवल पूजा-पद्धति और कर्मकांड तक सीमित नहीं किया जा सकता।

17 से 19 सितंबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवा शामिल हो रहे हैं। शुक्रवार को हुए मुख्य सत्र में मोहन भागवत ने धर्म और रिलिजन के अंतर को समझाते हुए इसे मानवीय जीवन को अनुशासित करने वाला मार्ग बताया।

धर्म और कर्मकांड का फर्क

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि कर्मकांड धर्म के अभ्यास का महज एक हिस्सा है, लेकिन वह पूरा धर्म नहीं है। उन्होंने कुश्ती का उदाहरण देते हुए युवाओं को समझाया कि जिस तरह खेल सीखने के लिए अखाड़े में नियमित अभ्यास और नियमों का पालन जरूरी है, उसी तरह धर्म के कर्मकांड और अनुशासन जीवन को साधने का माध्यम हैं।

"धर्म को केवल रिलिजन या पूजा-पद्धति के रूप में देखना उचित नहीं है। यह मनुष्य के जीवन को अनुशासन, दिशा और सही उद्देश्य देने वाली व्यापक अवधारणा है।" — डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक, आरएसएस

उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य जीवन में अर्थ और काम से जुड़े भौतिक सुखों की आकांक्षा रखता है, लेकिन धर्म का पालन इन सुखों के साथ व्यक्ति को मोक्ष की दिशा में भी ले जाता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महाभारत की फलश्रुति और भारत सावित्री के भाव का उल्लेख किया।

19 सितंबर को होगा समापन

इस युवा धर्म संसद में धर्म के अलावा संस्कृति, शिक्षा, तकनीक, मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में गीतकार मनोज मुंतशिर, स्वामी अवधेशानंद गिरि और सेवाग्य संस्थान के संरक्षक स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज समेत देश के कई संत और विद्वान युवाओं से संवाद कर रहे हैं।

19 सितंबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में इस तीन दिवसीय आयोजन का समापन होगा। कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

युवा धर्म संसद का आयोजन कहाँ और कब हो रहा है?

युवा धर्म संसद का आयोजन उज्जैन के गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है।

मोहन भागवत ने धर्म और किस अवधारणा में अंतर समझाया?

मोहन भागवत ने धर्म और रिलिजन (पूजा-पद्धति) के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म जीवन को अनुशासन और दिशा देने वाली व्यापक अवधारणा है।

इस आयोजन में कितने राज्यों के युवा भाग ले रहे हैं?

इस युवा धर्म संसद में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से युवा शामिल हो रहे हैं।

युवा धर्म संसद का समापन कब और किसकी उपस्थिति में होगा?

युवा धर्म संसद का समापन 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में होगा।