बुरहानपुर जिले में जल संरक्षण के लिए चलाई जा रही अमृत सरोवर योजना के तहत पतोंडा गांव में हुए निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गए हैं। करीब 40 लाख रुपये की लागत से बनाए गए तीन सरोवरों में पानी का नामोनिशान नहीं है और मौके पर सिर्फ जेसीबी से की गई गहरी खुदाई नजर आ रही है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जनपद पंचायत ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
लाखों रुपये खर्च, पर मौके पर सिर्फ गड्ढे
ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ाने और पानी की किल्लत दूर करने के उद्देश्य से अमृत सरोवर योजना शुरू की गई थी। बुरहानपुर जिले में इस योजना के तहत अब तक कुल 64 अमृत सरोवर तैयार किए जाने का दावा किया गया है।
लेकिन जब स्थानीय स्तर पर पतोंडा गांव के सरोवरों की पड़ताल की गई, तो सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आई। कागजों और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों सरोवरों के निर्माण पर भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। दस्तावेजों के अनुसार, पहले सरोवर पर 16 लाख 12 हजार रुपये, दूसरे पर 14 लाख 85 हजार रुपये और तीसरे सरोवर पर 9 लाख 4 हजार रुपये की लागत आई है। कुल मिलाकर इन तीनों संरचनाओं पर करीब 40 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं।
जलभराव न होने से गुणवत्ता पर सवाल
लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ज़मीनी हालात पूरी तरह उलट हैं। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि सरोवरों के नाम पर केवल बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए हैं।
सितंबर का महीना होने और अच्छी बारिश के बावजूद इन संरचनाओं में पानी का भारी अभाव है। जहां इस समय तालाबों में हजारों घन मीटर पानी संग्रहित होना चाहिए था, वहां केवल सूखी जमीन और मिट्टी दिखाई दे रही है। इस स्थिति ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के सदुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनपद सीईओ ने दिए जांच के निर्देश
मामले तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। बुरहानपुर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) संजय सिंह ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है।
जनपद सीईओ संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा- "पतोंडा गांव में बनाए गए अमृत सरोवरों की स्थिति की पूरी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि निर्माण कार्य में किस तरह की अनियमितताएं हुईं और स्वीकृत राशि का उपयोग नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं।"
