बुरहानपुर जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अनियमितताओं के चलते सील किए गए अस्पतालों को दोबारा संचालन की अनुमति मिलने की प्रक्रिया को लेकर खंडवा-बुरहानपुर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मोर्चा खोल दिया है। सांसद ने इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों और अस्पताल संचालकों के बीच सांठगांठ की आशंका जताई है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में गुड हॉस्पिटल, गरकल हॉस्पिटल और ग्लोबल हॉस्पिटल समेत कई निजी अस्पतालों में गंभीर कमियां पाई गई थीं। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए लाइसेंस और पंजीयन निरस्त करने या संचालन रोकने के आदेश दिए थे। हालांकि, कुछ ही समय बाद इन अस्पतालों के दोबारा शुरू होने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किस प्रक्रिया के तहत इन्हें फिर से हरी झंडी दे दी गई।
सांसद ने कलेक्टर और हेल्थ कमिश्नर से चर्चा की कही बात
मामले को तूल पकड़ता देख सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आई है कि अनियमितताओं के नाम पर पहले नोटिस दिए जाते हैं और बाद में पर्दे के पीछे लेनदेन कर दोबारा अनुमति दे दी जाती है।
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा- "मेरे ध्यान में यह विषय लाया गया है कि जो हॉस्पिटल अनियमितताओं के चलते बंद किए जाते हैं और फिर पुनः जांच करवाकर चालू कर दिए जाते हैं, इसमें जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे यह भी जानकारी लगी है कि कुछ को जानबूझकर बंद करने का नोटिस दिया जाता है और फिर बैठकर थोड़ी-बहुत कार्रवाई करवाकर, लेनदेन करवाकर दोबारा परमिशन दी जा रही है। इस संबंध में मैं कलेक्टर और हेल्थ कमिश्नर से भी बात करूंगा।"
नेपानगर के अमन हॉस्पिटल से लेकर ग्लोबल हॉस्पिटल तक पर उठे सवाल
अमरावती रोड स्थित गुड हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की छापामार कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मरीजों के उपचार का मामला सामने आया था। इसके बाद पंजीयन को लेकर कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब दोबारा अनुमति मिलने की प्रक्रिया पर स्थानीय स्तर पर फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नेपानगर के अमन हॉस्पिटल और अंडा बाजार स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। ग्लोबल हॉस्पिटल का संचालन एक माह के लिए रोकने के बाद प्रबंधन ने कमियां दूर करने का दावा किया था, लेकिन हालिया जांच में भी व्यवस्थाओं को लेकर संशय बरकरार है। गरकल हॉस्पिटल के मामले में भी अगस्त 2026 में सीएमएचओ द्वारा मानक पूरे न मिलने पर लाइसेंस निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
प्रशासनिक भूमिका और आगे की सुगबुगाहट
स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र कुमार वर्मा द्वारा की गई इन कार्रवाइयों के बाद अब दोबारा बहाலி की प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। सांसद ने अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर समय पर संज्ञान न लेने का मुद्दा भी उठाया है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर हर्ष सिंह और स्वास्थ्य कमिश्नर के साथ होने वाली बैठकों के बाद प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या दोषी अधिकारियों पर गाज गिरती है।
