Friday, 6 November 2026
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धनतेरस पर मंदसौर के कुबेर मंदिर में उमड़ी भीड़: रावण की ससुराल में केदारनाथ जैसी दुर्लभ शिव पंचायत के दर्शन को पहुंचे भक्त

संक्षेप में

धनतेरस के अवसर पर मंदसौर के खिलचीपुरा स्थित प्राचीन श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर में भगवान कुबेर के दर्शन के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। केदारनाथ की तरह यहाँ भी शिव पंचायत में कुबेर देव की 1200 साल पुरानी दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है।

मुख्य बातें

  • खिलचीपुरा स्थित श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर में धनतेरस पर विशेष अनुष्ठान हुए।
  • भगवान कुबेर की प्रतिमा सातवीं शताब्दी के उत्तर गुप्तकालीन दौर की है।
  • केदारनाथ के बाद मंदसौर देश का दूसरा ऐसा स्थान है जहाँ शिव पंचायत में कुबेर विराजित हैं।
  • वर्ष 1978 में इस तीन फीट ऊंची चतुर्भुज प्रतिमा की भगवान कुबेर के रूप में पहचान हुई थी।
मध्य प्रदेश
धनतेरस पर मंदसौर के कुबेर मंदिर में उमड़ी भीड़: रावण की ससुराल में केदारनाथ जैसी दुर्लभ शिव पंचायत के दर्शन को पहुंचे भक्त

धनतेरस के पावन अवसर पर भगवान शिव की नगरी मंदसौर में आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला। खिलचीपुरा क्षेत्र स्थित प्राचीन श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर में धन के देवता भगवान कुबेर के दर्शन के लिए अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रावण की ससुराल के रूप में अपनी ऐतिहासिक पहचान रखने वाले इस शहर में धनतेरस पर कुबेर देव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है।

मंदिर परिसर में सुबह चार बजे से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। भगवान कुबेर और महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु अपने घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। इस दौरान मंदिर में विशेष महाभिषेक, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर देर रात तक जारी रहने की संभावना है।

1200 साल पुरानी प्रतिमा और इसका इतिहास

यह मंदिर धार्मिक और पुरातात्विक दोनों दृष्टियों से बेहद खास है। लगभग 1200 वर्ष प्राचीन इस मंदिर में स्थापित भगवान कुबेर की प्रतिमा सातवीं शताब्दी के उत्तर गुप्तकालीन दौर की बताई जाती है। पुरातत्ववेत्ता डॉ. कैलाश शर्मा के मुताबिक, मराठाकाल में मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण के दौरान इस दुर्लभ प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित किया गया था।

इतिहास के पन्नों में इस प्रतिमा की पहचान 1978 में आधिकारिक तौर पर सामने आई थी। करीब तीन फीट ऊंची इस प्राचीन प्रतिमा में भगवान कुबेर चतुर्भुज मुद्रा में विराजमान हैं। उनके हाथों में धन की थैली और प्याला सुशोभित है, जबकि प्रतिमा पर नेवले का अंकन इसे और भी विशिष्ट बनाता है।

केदारनाथ जैसी दुर्लभ शिव पंचायत

देशभर में शिव मंदिरों की कमी नहीं है, लेकिन शिव पंचायत में भगवान कुबेर की उपस्थिति बेहद दुर्लभ मानी जाती है। देश में केवल दो ही ऐसे प्रमुख स्थान हैं जहां शिव पंचायत में कुबेर देव विराजित हैं—एक उत्तराखंड का प्रसिद्ध केदारनाथ धाम और दूसरा मंदसौर का यह धौलागढ़ महादेव मंदिर।

ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन इस मंदिर में आकर धन के देवता के दर्शन करने से वर्षभर आर्थिक संपन्नता बनी रहती है। यही वजह है कि दीपावली के इस पर्व पर मंदसौर की यह ऐतिहासिक धरोहर देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मंदसौर के किस मंदिर में धनतेरस पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी?

मंदसौर के खिलचीपुरा क्षेत्र स्थित प्राचीन श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर में धनतेरस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर की कुबेर प्रतिमा कितनी पुरानी है?

मंदिर में स्थापित भगवान कुबेर की प्रतिमा करीब 1200 वर्ष प्राचीन है, जो सातवीं शताब्दी के उत्तर गुप्तकालीन दौर की मानी जाती है।

केदारनाथ के अलावा देश में शिव पंचायत में कुबेर कहां विराजित हैं?

केदारनाथ धाम के अलावा केवल मंदसौर के श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर में ही शिव पंचायत में भगवान कुबेर की प्रतिमा स्थापित है।

मंदसौर के कुबेर मंदिर की प्रतिमा की पहचान कब हुई थी?

वर्ष 1978 में इस करीब तीन फीट ऊंची चतुर्भुज प्रतिमा की पहचान भगवान कुबेर के रूप में हुई थी।